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Som Pradosh Vrat Katha, 30 March 2026: सोम प्रदोष व्रत रखने वाले श्रद्धालु आज शाम जरूर पढ़ें यह दिव्य कथा, हर मनोकामना होगी पूर्ण

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Mar 30, 2026 07:05 am IST,  Updated : Mar 30, 2026 07:05 am IST

Som Pradosh Vrat Katha, 30 March 2026: आज मार्च का दूसरा सोम प्रदोष व्रत है। ये व्रत भगवान शिव को समर्पित है। कहते हैं जो भी ये व्रत रखता है उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन व्रत रखने वालों को गरीब ब्राह्मणी की कथा जरूर सुननी चाहिए।

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सोम प्रदोष व्रत कथा Image Source : CANVA

Som Pradosh Vrat Katha, 30 March 2026: सनातन धर्म में सोम प्रदोष व्रत की बड़ी महिमा बताई गई है। कहते हैं जो कोई श्रद्धालु इस व्रत को रखता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। ये व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है इसलिए इसे त्रयोदशी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत में भगवान शिव की पूजा की जाती है। ये व्रत एकादशी के बाद आता है। वैसे तो हर महीने में दो प्रदोष व्रत पड़ते हैं, लेकिन किसी-किसी महीने 3 प्रदोष व्रत भी पड़ जाते हैं। जैसे मार्च में 3 प्रदोष व्रत पड़े हैं। चलिए अब जान लेते हैं प्रदोष व्रत के दिन कौन सी कथा पढ़ी या सुनी जाती है।

Som Pradosh Vrat Katha (सोम प्रदोष व्रत कथा)

सोम प्रदोष व्रत की कथा अनुसार एक नगर में एक विधवा ब्राह्मणी रहती थी। उसका कोई आश्रयदाता नहीं था, इसलिए वो सुबह होते ही अपने पुत्र के साथ भीख मांगने निकल पड़ती थी। भिक्षाटन से जो कुछ मिलता था उसी से वो अपने और अपने पुत्र का पेट पालती थी। एक दिन ब्राह्मणी जब अपने घर लौट रही थी तो उसे एक लड़का घायल अवस्था में मिला। ब्राह्मणी को उस पर दया आ गई और वो उसे अपने घर ले आई। वह लड़का विदर्भ का राजकुमार था। उसके राज्य पर शत्रु सैनिकों ने आक्रमण कर उसके पिता को बन्दी बना लिया था इसलिए वह मारा-मारा फिर रहा था।

राजकुमार ब्राह्मणी और ब्राह्मण-पुत्र के साथ उनके घर रहने लगा। एक दिन अंशुमति नामक एक गंधर्व कन्या ने राजकुमार को देखा, जो उस पर मोहित हो गई। अगले दिन अंशुमति के माता-पिता राजकुमार से मिलने आए। उन्हें भी राजकुमार पसंद आ गया। कुछ दिनों बाद अंशुमति के माता-पिता को भगवान शिव सपने में दिखाई दिए और उन्होंने उनको आदेश दिया कि राजकुमार और अंशुमति का विवाह कर दिया जाए। उन्होंने वैसा ही किया।

ब्राह्मणी विधि विधान प्रदोष व्रत किया करती थी। उसके व्रत के प्रभाव और गंधर्वराज की सेना की मदद से राजकुमार ने विदर्भ से शत्रुओं को खदेड़ दिया और अपने पिता के राज्य को फिर से प्राप्त कर लिया। इसके बाद वो अपने परिवार सहित आनन्दपूर्वक रहने लगा। राजकुमार ने ब्राह्मण-पुत्र को अपना मंत्री बनाया। ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत के माहात्म्य से जैसे राजकुमार और ब्राह्मण-पुत्र के दिन फिरे, वैसे ही इस व्रत को करने से शंकर भगवान अपने सभी भक्तों के भी दिन फेरते हैं। बोलो हर हर महादेव !

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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